कौन कहता है ये बला है इश्क़
ग़म-ज़दों के लिए शिफ़ा है इश्क़
मैं सुना हूँ हकीम को कहते
क़ल्ब की कार-गर दवा है इश्क़
देख कर मह-जबीं को समझा मैं
दिल के धड़कन की इक सदा है इश्क़
कह रहा था हराम आलिम इक
जबकि इक नेक ये अदा है इश्क़
इश्क़ का जिस ने ज़ाइक़ा चक्खा
फिर न बोला कि ये बुरा है इश्क़
गर नहीं मिल सका ख़ुदा-हाफ़िज़
मिल गया गर जो फिर ख़ुदा है इश्क़
जिस ख़ता पे मैं रक़्स करता हूँ
ज़िंदगी की वही ख़ता है इश्क़
इश्क़ कर मर गए सभी लेकिन
पर अभी तक नहीं मरा है इश्क़
जिस
में मर कर भी लोग जीते हैं
ख़ूब-सूरत वो हादसा है इश्क़
तू क़यामत तलक रहे ज़िंदा
मेरा तुझ को यही दुआ है इश्क़
हैं ये अरमान सूफ़िया कहते
रूह की पाक इक ग़िज़ा है इश्क़















