ख़ुद से कर ली है दुश्मनी हम नेतोड़ कर के ये आशिक़ी हम नेहम ने सिगरेट तो नहीं फूँकीफूँक डाली ये ज़िन्दगी हम नेअब न उम्मीद है न शिकवा हैछोड़ दी सारी बन्दगी हम नेआप को चाहा जान से ज़्यादाआप से की थी दिल-लगी हम नेऔर क्या आप को सनद दूँ मैंआप पर की है शा'इरी हम ने— Arman Habib