बस देख कर जिसने नज़र तक बदली है
वो सबसे ये कहती थी मुझ पर मरती है
इक बाज़ी ही मैंने अभी तक हारी है
बाज़ी जो उसने मेरे दिल पर खेली है
जब छोड़ कर के अपनी यादें तू गई
उस दिन से अब तक दिल का ये घर खाली है
मैं शहर का बिगड़ा हुआ इक लड़का था
सो शहर के शहज़ादे से वो ब्याही है
अब नाज़ उसके जाने ढोता कौन है
जाने किसे ही फ़ोन अब वो करती है
देखो उसे मत छेड़ो मेरे नाम से
यारों सुनो वो लड़की भोली भाली है
देखो किसी पर उम्र ज़ाए करना मत
इश्क़ ओ मोहब्बत की कहानी फ़ानी है
लब पर मेरे लब अपने रख कर देख फिर
किसने कहा जाँ में नहीं जाँ घुलती है
तू क्या गई पानी यहां पर छोड़ कर
इन शाख़ों पर तब से उदासी लिपटी है
दीवाने ने खत में लिखा है ये मुझे
सय्यद यहाँ मिट्टी है हाँ बस मिट्टी है
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