aankhoñ ko uske KHvaab ka haasil dikhaayenge | आँखों को उसके ख़्वाब का हासिल दिखाएँगे

  - Aves Sayyad

आँखों को उसके ख़्वाब का हासिल दिखाएँगे
तुझको सजा के ख़्वाब की ताबीर लाएँगे

बीनाई इंतिज़ार की सूरत बनेगी देख
आँखों को इंतिज़ार के क़ाबिल बनाऍंगे

वहशत से दूर रक्खेंगे हम अपनी दास्ताँ
दुनिया को दोस्ती के मआनी बताएँगे

इक रोज़ रहमतों को तेरे सर करेंगे हम
इक रोज़ तेरे नाम का बादल बनाएँगे

जो हम सेे आश्ना रहे हम उनकी क़ब्र पर
हर दिन दिया जलाएँगे आँसू बहाएँगे
सहरा में आज़माई है उसने इबादतें
हम आने वाली नस्ल को ज़मज़म पिलाएँगे

जितनी हसीन दिखती है उतनी नहीं है ये
मिट्टी की काएनात को जन्नत बनाएँगे

मफ़्हूम से ही जिसके ये दिल ख़ौफ़ खाता है
'सय्यद' वो इक ग़ज़ल भला कैसे सुनाएँगे

  - Aves Sayyad

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