आँखों को उसके ख़्वाब का हासिल दिखाएँगे
तुझको सजा के ख़्वाब की ताबीर लाएँगे
बीनाई इंतिज़ार की सूरत बनेगी देख
आँखों को इंतिज़ार के क़ाबिल बनाऍंगे
वहशत से दूर रक्खेंगे हम अपनी दास्ताँ
दुनिया को दोस्ती के मआनी बताएँगे
इक रोज़ रहमतों को तेरे सर करेंगे हम
इक रोज़ तेरे नाम का बादल बनाएँगे
जो हम सेे आश्ना रहे हम उनकी क़ब्र पर
हर दिन दिया जलाएँगे आँसू बहाएँगे
सहरा में आज़माई है उसने इबादतें
हम आने वाली नस्ल को ज़मज़म पिलाएँगे
जितनी हसीन दिखती है उतनी नहीं है ये
मिट्टी की काएनात को जन्नत बनाएँगे
मफ़्हूम से ही जिसके ये दिल ख़ौफ़ खाता है
'सय्यद' वो इक ग़ज़ल भला कैसे सुनाएँगे
As you were reading Shayari by Aves Sayyad
our suggestion based on Aves Sayyad
As you were reading undefined Shayari