jaan-nisaaron ko na farda kii khabar hoti hai | जाँ-निसारों को न फ़र्दा की ख़बर होती है

  - Dharmesh bashar

जाँ-निसारों को न फ़र्दा की ख़बर होती है
ज़िंदगी मौत के साए में बसर होती है

बा-हुनर हो के भी क़ाइम न रहे ज़ौक़-ए-हुनर
सच तो ये है कि ये तौहीन-ए-हुनर होती है

एक इक करके सितारों को सुलाती है नसीम
तब कहीं जा के नुमूदार सहर होती है

इब्तिदा जानिए अब अगली सफ़र की उसको
राह-ए-उल्फ़त में न तकमील-ए-सफ़र होती है

रौशनी प्यार की ज़ालिम के दिल-ए-मुज़्लिम में
लोग कहते हैं नहीं होती मगर होती है

ढूँढ ही लेते हैं हर हाल शिकार अपना 'बशर'
कुछ परिंदों की बड़ी तेज़ नज़र होती है

  - Dharmesh bashar

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