मैं इश्क़ इश्क़ करता फिरता गली गलीघर से मिरे पढ़ाई का कहके निकला हूँये उम्र मौज मस्ती की है नई नईफिर भी शराब पीने मैं छिप के निकला हूँ— Bhanwar Mandan