
मैं मोहब्बत को अगर दोस्त से बढ़कर कहता
हाल यूँ होता कि मैं मय-कदे को घर कहता
फिरता रह जाता मैं यूँ उस के ही आगे पीछे
देखता कोई अगर मुझ को तो नौकर कहता
— Bhuwan Singh
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