आ रहा था सो उसे लेते हुए मैं आ गया
और फिर वो शख़्स मेरे सारे ग़म को खा गया
मैं तो वो हूँ जिस को ठुकराए हुए भी ठुकरा दें
अब ख़ुदा जाने मैं उस लड़की को कैसे भा गया
कहते कहते थक गया सुनता नहीं कोई यहाँ
पूछते हैं अब सभी जब शक्श वो मारा गया
मैं हुआ इस तरह से बर्बाद उस के इश्क़ में
मानो जैसे एक बिस्तर कोई खटमल खा गया
उम्र तक मैं ने गुज़ारी दूसरों के वास्ते
फिर भी ब्रज हर बार मुझ को ही ग़लत समझा गया
— Brajnabh Pandey















