जान दी थी जिस ने रानी के लिए
रोए थे सब उस सिपाही के लिए
रात का वो हादसा काफ़ी है दोस्त
उम्र भर की इस उदासी के लिए
यूँ नहीं मानेगी वो ऐ दोस्त सुन
जान देनी होगी शादी के लिए
तोड़ना सारे के सारे सपनों को
मस्खरी सा है ग़रीबी के लिए
बे-वफ़ाई भी की तो आधी ही ख़ैर
कुछ तो छोड़ा उस दिवानी के लिए
यार वो बच्चा भी रोता रह गया
रात भर बस इक कहानी के लिए
ब्रज पिता की उम्र गुज़री लोन में
बस तेरी अच्छी जवानी के लिए
— Brajnabh Pandey















