gulaabi rang sa kuchh gir raha hai tere gaalon se | गुलाबी रंग सा कुछ गिर रहा है तेरे गालों से

  - Danish Balliavi

गुलाबी रंग सा कुछ गिर रहा है तेरे गालों से
पता है सबको ख़ुश्बू आ रही है तेरे बालों से

न जाने क्यूँ नहीं मिलने मुझे देते हैं तुझ सेे लोग
बग़ावत करनी है मुझको यूँँ तेरे शहर वालों से

रक़ीबों से बहुत बढ़ता है तेरा दिन पे दिन रिश्ता
किसी दिन मैं निकालूँगा तुझे अपने ख़यालों से

कभी मत करना तू मुझ सेे बहस इस बे-वफ़ाई पर
नहीं तो तय है तुझको तंग कर दूँगा सवालों से

अँधेरों में तेरी गुजरी है पूरी ज़िंदगी 'दानिश'
गुज़ारिश है न जल तू अब मेरे घर के उजालों से

  - Danish Balliavi

Diversity Shayari

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