बड़ी मुश्किल हुई थी मुझ को मगर काट दिए
हिज्र में थे जो मेरे गर्द-ए-सफ़र काट दिए
मेरे सय्याद को थी इतनी मुहब्बत मुझ से
कि बड़े प्यार से उस ने मेरे पर काट दिए
काम निकले जो भुला बैठे फिर अहबाब सभी
छाँव आनी जो हुई बंद शजर काट दिए
— Dipendra Singh 'Raaz'
हिज्र में थे जो मेरे गर्द-ए-सफ़र काट दिए
मेरे सय्याद को थी इतनी मुहब्बत मुझ से
कि बड़े प्यार से उस ने मेरे पर काट दिए
काम निकले जो भुला बैठे फिर अहबाब सभी
छाँव आनी जो हुई बंद शजर काट दिए
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