उस के मुँह पे मुकर गया था दिल

आज हद से गुज़र गया था दिल

मुझ को कहनी थी दिल की बात मगर
देख के उस को भर गया था दिल

दिल नहीं डरता था किसी से भी
इश्क़ से फिर भी डर गया था दिल

झूठे लोगों से दिल नहीं भरा था
सच्चे लोगों से भर गया था दिल

ग़ैर के साथ देख कर उस को
ज़िंदा हो कर भी मर गया था दिल

— Divyansh Rawat

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