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SHER
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा — Allama Iqbal
SHER
सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में
कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता
Munawwar Rana
सगी बहनों का जो रिश्ता रिश्ता है उर्दू और हिन्दी में कहीं दुनिया की दो ज़िंदा ज़बानों में नहीं मिलता — Munawwar Rana
SHER
हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ
हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए
Sahir Dehlavi
हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए — Sahir Dehlavi
SHER
गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से
मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है
Satish Shukla Raqeeb
गले मिली कभी उर्दू जहाँ पे हिन्दी से मिरे मिज़ाज में उस अंजुमन की ख़ुशबू है — Satish Shukla Raqeeb
SHER
बेगानी इस दुनिया का, ताना-बाना सुन
उक्ता के उन सेे हिन्दी का इक गाना सुन
Alankrat Srivastava
बेगानी इस दुनिया का, ताना-बाना सुन उक्ता के उन सेे हिन्दी का इक गाना सुन — Alankrat Srivastava
SHER
ये वाट व्हेयर आप के यूँँ तो हमें अच्छे लगे
पर ताज़गी के वास्ते हिन्दी में कुछ बातें कहें
Bhoomi Srivastava
ये वाट व्हेयर आप के यूँँ तो हमें अच्छे लगे पर ताज़गी के वास्ते हिन्दी में कुछ बातें कहें — Bhoomi Srivastava
SHER
लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कुराती है
Munawwar Rana
लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कुराती है — Munawwar Rana
SHER
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना
Unknown
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना — Unknown
SHER
'मुसहफ़ी' फ़ारसी को ताक़ पे रख
अब है अशआर-ए-हिंदवी का रिवाज
Mushafi Ghulam Hamdani
'मुसहफ़ी' फ़ारसी को ताक़ पे रख अब है अशआर-ए-हिंदवी का रिवाज — Mushafi Ghulam Hamdani
SHER
हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी
लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है
Prof. Rehman Musawwir
हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है — Prof. Rehman Musawwir
SHER
जब से बच्चों को पसंद आई हैं हिन्दी फिल्में
मुझ को अब्बा नहीं कहते वो पिता कहते हैं
Khalid Irfan
जब से बच्चों को पसंद आई हैं हिन्दी फिल्में मुझ को अब्बा नहीं कहते वो पिता कहते हैं — Khalid Irfan
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