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Ram Navami Shayari
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SHER
एक सीता की रिफ़ाक़त है तो सब कुछ पास है ज़िंदगी कहते हैं जिस को राम का बन-बास है — Hafeez Banarasi
SHER
सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ़ राम हैं
भाव सूचियाँ बहुत हैं भाव सिर्फ़ राम हैं
Aman Akshar
सारा जग है प्रेरणा प्रभाव सिर्फ़ राम हैं भाव सूचियाँ बहुत हैं भाव सिर्फ़ राम हैं — Aman Akshar
SHER
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब — Asghar Mehdi Hosh
SHER
जिन की दर्द-भरी बातों से एक ज़माना राम हुआ
'क़ासिर' ऐसे फ़न-कारों की क़िस्मत में बन-बास रहा
Ghulam Mohammad Qasir
जिन की दर्द-भरी बातों से एक ज़माना राम हुआ 'क़ासिर' ऐसे फ़न-कारों की क़िस्मत में बन-बास रहा — Ghulam Mohammad Qasir
SHER
हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ
जल रही है दिल-ए-पुर-नूर की लंका देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
हो गए राम जो तुम ग़ैर से ए जान-ए-जहाँ जल रही है दिल-ए-पुर-नूर की लंका देखो — Kalb-E-Hussain Nadir
SHER
है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद — Allama Iqbal
SHER
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे
बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे
Kavi Naman bharat
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे — Kavi Naman bharat
NAZM
"चुनौती"
— Surayya Rahman
"चुनौती" मैं सीता हूँ तुम राम बनो मैं पावन घर की रानी हूँ परिवार चलाने वाली हूँ इस देश की मैं रखवाली हूँ सम्मान बढ़ाने वाली हूँ मैं वचन निभाने वाली हूँ मैं सीता हूँ तुम राम बनो तुम बन के भौंरा कली कली मंडलाते हो उड़ जाते हो विश्वास महल की दीवारें हर रोज़ ख़ुद ही तुम ढाते हो विश्वास महल की दीवारें मैं रोज़ उठाया करती हूँ मैं सीता हूँ तुम राम बनो सच कहना सच के मोती से क्या प्यार का आँचल भर दोगे विश्वास निभाने की ख़ातिर क्या अग्नी परिक्षा दे दोगे — Surayya Rahman
SHER
दुनिया भर की राम-कहानी किस किस ढंग से कह डाली
अपनी कहने जब बैठे तो एक एक लफ़्ज़ पिघलता था
Khalilur Rahman Azmi
दुनिया भर की राम-कहानी किस किस ढंग से कह डाली अपनी कहने जब बैठे तो एक एक लफ़्ज़ पिघलता था — Khalilur Rahman Azmi
SHER
एक काटा राम ने सीता के साथ
दूसरा वनवास मेरे नाम पर
Nasir Shahzad
एक काटा राम ने सीता के साथ दूसरा वनवास मेरे नाम पर — Nasir Shahzad
GHAZAL
दशरथ जी की बंजर आँखें
कैकेई की विषधर आँखें
Ravi Goswami
दशरथ जी की बंजर आँखें कैकेई की विषधर आँखें राम गए वन बनने भगवन कौशल्या की पत्थर आँखें भाई लखन सा कोई न दूजा चलने को हैं तत्पर आँखें आग लगी है सब आँखों में माँ सीता हैं पुष्कर आँखें उर्मिल को कोई क्या लिक्खे तन्हाई का अंबर आँखें काट गई हैं कर्म की रेखा इक दासी की ख़ंजर आँखें छोड़ नगर को जाते रघुवर सब लोगों की झर-झर आँखें — Ravi Goswami
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