नया कोई मुझे फिर ख़्वाब दोगे क्या
मिरी नींदें मुझी से छीन लोगे क्या
तुम्हें तो बस किताबों में महारत है
भला तुम मेरी ख़ामोशी पढ़ोगे क्या
जहाँ कोई न बंदिश हो ज़माने की
उन्हीं राहों पे हमको तुम मिलोगे क्या
हमें कुछ रोज़ का रिश्ता नहीं रखना
कहो हर जन्म तुम मेरे रहोगे क्या
सुना है तुम को नफ़रत मैकशी से है
ज़रा सी 'इश्क़ में मेरे पियोगे क्या
बड़ी शौक़ीन लगती हो मुहब्बत की
विरह की आग में हर पल जलोगे क्या
हमारे साथ में जीना नहीं मुमकिन
बताओ साथ में मेरे मरोगे क्या
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