जश्न, शोक, जो कुछ भी हो मनाना पड़ता हैजैसे हम नहीं हों वैसे दिखाना पड़ता हैएक दिन ख़ुशी से जो बीत जाए तो हम कोचार दिन दुखी हो कर के चुकाना पड़ता है— Harsh Raj