
तेरी कमाँ के बस से भी आगे निकल गया
मैं इश्क़ में हवस से भी आगे निकल गया
अपनी तलाश में जो निकाला गया था पल
वो पल तो सौ बरस से भी आगे निकल गया
लुक्का छिपी के वक़्त तुम्हारे ख़याल में
गिनने लगा तो दस से भी आगे निकल गया
है जिन की दस्तरस में ज़मीं और आस्माँ
मैं उन की दस्तरस से भी आगे निकल गया
— habib kinkhabwala















