वो हमेशा की तरह कल रात हम को ख़्वाब मेंफिर बदन की चाँदनी से हम को नहलाते रहेवो समझते थे के हम आज़ाद दीवानों में हैंशबनमी मुस्कान से जो हम को बहकाते रहे— Azad Suhawanpuri