बिन न उस के जी सकेगा सोच ले
जब किसी से दिल लगेगा सोच ले
शर्त इतनी है कभी जब वो कहे
हिज्र में हँसना पड़ेगा सोच ले
सोच कर के ही क़दम इस
में बढ़ा
लौटना मुश्किल रहेगा सोच ले
लाख तेरे होंठ मुस्काते रहे
दिल मगर रोता रहेगा सोच ले
ग़ैर पागल और अपने भी कहें
तंज़ ऐसे तू सहेगा सोच ले
बात मन की कौन सुनता है यहाॅं
तू यहाॅं किस से कहेगा सोच ले
ख़ैर दुनिया से लड़ोगे पर यहाॅं
किस तरह ख़ुद से लड़ेगा सोच ले
— Inshpa Ilahabadi















