भरोसा ही नहीं होता हुए मग़रूर बैठे हैंदिलों के पास रहते थे यही जो दूर बैठे हैंकिया जो आँख ढक कर के भरोसा देखना इक दिनयही तोड़ें न तेरा दिल बने जो हूर बैठे हैं— Inshpa Ilahabadi