यहाँ से दफ़ा हो कहो उस फ़ुलाँ सेशिकायत जिसे है हमारी यहाँ सेसमझ ही न पाए हमें वो कभी भीबुरा दिल नहीं बस बुरे हैं ज़बाँ से— Inshpa Ilahabadi