मुझ को अक्सर क़यास होता है
वो मिरे आस पास होता है
ख़ुशबुएँ पेश-पेश होती हैं
आने वाला जो ख़ास होता है
वो चला जाता है तो जाने क्यूँ
शहर सारा उदास होता है
हर कोई आदमी नहीं होता
आदमी ग़म-शनास होता है
रूठ जाता हूँ आदतन 'असलम'
वो मना लेगा आस होता है
— Javed Aslam















