tu jo chahe teri nazaron se giraa de mujh ko | तू जो चाहे तेरी नज़रों से गिरा दे मुझ को

  - Javed Aslam

तू जो चाहे तेरी नज़रों से गिरा दे मुझ को
तेरे बस में नहीं के दिल से भुला दे मुझ को

लड़ के तूफ़ाँ से उतर तो गया हूँ साहिल पर
अब किधर जाऊँ कोई ये तो बता दे मुझ को

हँस चुका ख़ूब यहाँ वहम-ओ-गुमाँ में रह कर
ज़िंदगी खोल दे अब राज़, रुला दे मुझ को

है ख़ता मेरी मोहब्बत पे यक़ीं रखता हूँ
अब तेरी मर्ज़ी है जो चाहे सज़ा दे मुझ को

मेरा तो हक़ है मेरे दिल पे जिसे भी रख लूँ
तेरा है फ़ैसला गर दिल से हटा दे मुझ को

ख़ुश हूँ ख़्वाबों में ही ता'बीर ज़रूरी क्यूँ है
डर है ऐ दोस्त कहीं तू न जगा दे मुझ को

एक अरसे से तुझे ढूँढ़ रहा हूँ 'असलम'
ज़िंदगी आ अभी, मुझ से ही मिला दे मुझ को

  - Javed Aslam

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