
जज़्बात-ओ-ख़यालात-ओ-मनाज़िर पे न रुकना
झोंके हैं हवाओं के ये चलते ही रहेंगे
हिजरत के भी दरवाज़े खुले रखना है दिल में
दुनिया है यहाँ लोग निकलते ही रहेंगे
— Javed Aslam
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