आदमी वक़्त पर गया होगावक़्त पहले गुज़र गया होगावो हमारी तरफ़ न देख के भीकोई एहसान धर गया होगाख़ुद से मायूस हो के बैठा हूँआज हर शख़्स मर गया होगाशाम तेरे दयार में आख़िरकोई तो अपने घर गया होगामरहम-ए-हिज्र था अजब इक्सीरअब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा— Jaun Elia