ओ पास होने वाले हम को भी साथ ले ले

हम रह गए अकेले
इक साथ रह के कैसा बचपन गुज़र रहा था
कितनी ख़ुशी से अपना जीवन गुज़र रहा था
किस काम का ये पढ़ना जो दोस्ती से खेले
ओ पास होने वाले हम को भी साथ ले ले
हम रह गए अकेले
वो तेरे साथ जा कर गलियों की सैर करना
स्कूल से निकल कर बाग़ों की सैर करना
जब तू नहीं तो अब हम जाएँ कहाँ अकेले
ओ पास होने वाले हम को भी साथ ले ले
हम रह गए अकेले
वो खेल खेल ही में कुछ देर रूठ जाना
फिर एक दूसरे को आपस ही में मनाना
अब कौन आ के मुझ से आख़िर वो खेल खेले
ओ पास होने वाले हम को भी साथ ले ले
हम रह गए अकेले
फिर फ़ेल हो गए हम अब घर को कैसे जाएँ
क्या शक्ल ले के अपने माँ बाप को दिखाएँ
चारों तरफ़ लगे हैं नाकामियों के मेले
ओ पास होने वाले हम को भी साथ ले ले
हम रह गए अकेले

— Kaif Ahmad Siddiqui

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