फ़ाएदा नहीं कोई जा के बड़बड़ाने मेंजब ज़मीर बिक जाए अफ़सरों का थाने मेंपलने वाला टुकड़ों पर ख़ुद को शे'र कहता हैज़िंदगी गुज़ारी है जिस ने दुम हिलाने में— Kartik Bhalerao