तस्वीर-ए-कायनात की सूरत बिगाड़ करक्या चाहते हो तुम भला सब तोड़-ताड़ करमुरझाए एक फूल तो होता हूँ मैं उदासहँसते हो कैसे तुम भला गुलशन उजाड़ कर— Kartik Bhalerao