kare jo qaid junoon ko vo jaal mat dena | करे जो क़ैद जुनूं को वो जाल मत देना

  - Kashif Adeeb Makanpuri

करे जो क़ैद जुनूं को वो जाल मत देना
हो जिस
में होश उसे ऐसा हाल मत देना

जो मुझ सेे मिलने का तुमको कभी ख़याल आए
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना

जो उसको देखूं तो बस देखता रहूँ उसको
अब उसके जैसा किसी को जमाल मत देना

जुनूं की रौ में जो दीवाना डगमगाये कभी
तो ऐसे हाल में उसको सम्भाल मत देना

तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल मैं जिस सेे रहने लगूं
मुझे तुम ऐसा हुनर या कमाल मत देना

फ़िराक़े यार में ये बाइसे मसर्रत हैं
तुम उनकी यादों को दिल से निकाल मत देना

ख़ुलूस बेच के दौलत कमाई हो जिसने
तुम ऐसे शख़्स की हम सेे मिसाल मत देना

तुम ही ने बख़्शा है काशिफ़ को अपने इतना उरूज
अब इस मुक़ाम पे लाकर ज़वाल मत देना

  - Kashif Adeeb Makanpuri

Sazaa Shayari

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