करे जो क़ैद जुनूँ को वो जाल मत देना
हो जिस
में होश उसे ऐसा हाल मत देना
जो मुझ से मिलने का तुम को कभी ख़याल आए
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना
जो उस को देखूं तो बस देखता रहूँ उस को
अब उस के जैसा किसी को जमाल मत देना
जुनूँ की रौ में जो दीवाना डगमगाये कभी
तो ऐसे हाल में उस को सम्भाल मत देना
तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल मैं जिस से रहने लगूं
मुझे तुम ऐसा हुनर या कमाल मत देना
फ़िराक़े यार में ये बाइसे मसर्रत हैं
तुम उन की यादों को दिल से निकाल मत देना
ख़ुलूस बेच के दौलत कमाई हो जिस ने
तुम ऐसे शख़्स की हम से मिसाल मत देना
तुम ही ने बख़्शा है काशिफ़ को अपने इतना उरूज
अब इस मुक़ाम पे ला कर ज़वाल मत देना















