न मैं चल सका हूँ न ये जाँ थकी हैग़ज़ब कश्मकश में ये अब ज़िंदगी हैसभी ये मुलाज़िम तेरे हो गए हैंमेरी इन निगाहों में बस बेबसी है— Kashif Hussain Kashif