न ख़्वाबों की ख़्वाहिश न जीने का मन है
हवा रूह है और मिट्टी का तन है
किसी को झुकाने की ताकत है इस
में
इसे चाहते सब महोदय ये धन है
वही ख़ुश रहा है हमेशा जहाँ में
किसी से ज़्यादा जो ख़ुद में मगन है
हमें ज्ञान देना नहीं भूलते जो
उन्हे दूर से अब हमारा नमन है
बहुत से शिकारी नज़र हैं गड़ाए
वो लड़की हसीं एक कोमल हिरन है
मियाँ ख़्वाहिशों को सवाहा करो तुम
ये जीवन तुम्हारा असल में हवन है
नहीं आग दिखती धुआँ भी न उट्ठा
हमें अब बता दे ये कैसी जलन है
— Kush Pandey ' Saarang '















