baap se maa ka mujhe paise chhupa kar dena | बाप से माँ का मुझे पैसे छुपा कर देना

  - Harsh Kumar Bhatnagar

बाप से माँ का मुझे पैसे छुपा कर देना
ग़लतियों पे मिरी वो डाँट भी अक्सर देना

ज़िंदगी गुज़रे किराए के मकाँ में ही भले
ऐ ख़ुदा पर मिरी औलाद को तू घर देना

तू बिछा देना मिरी क़ब्र पे सूखे पत्ते
पर ज़रूरत हो जिसे उसको तू चादर देना

हौसला देना तू महफ़िल में नए शायर को
शे'र जैसा भी हो बस दाद बराबर देना

ज़िंदगी काट चुका है जो सड़क पर अपनी
मौत के वक़्त उसे फूल सा बिस्तर देना

'हर्ष' महफ़िल में तिरे कहने पे आएगा मगर
शे'र सुनना हो तो सिगरेट भी जला कर देना

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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