
चराग़-ए-लौ को इस बाद-ए-सबा ने मार डाला
परिंदे को शिकारी की वफ़ा ने मार डाला
कोई तो चार-दीवारी में घुट कर ख़ुश रहा है
किसी को तो ज़रा सी बस हवा ने मार डाला
— Harsh Kumar Bhatnagar
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