बस इस लिए अपना गुज़ारा हो गया
हर ग़म मिरा ख़ुद का सहारा हो गया
कुछ देर क्या लेटा उदासी ओढ़ कर
ये ख़ुद मिरा था और प्यारा हो गया
ये इश्क़ हम ने कर लिया था दोस्तो
ये हाल क्या देखो हमारा हो गया
थोड़ी ख़ुशी की आस में बैठा रहा
इस में मिरा काफ़ी ख़सारा हो गया
तुम ने मुझे छोड़ा तभी से देख लो
ये दिल मिरा फिर बे-सहारा हो गया
क्या ग़म भरी ग़ज़लें लिखेंगे उम्र भर
क्या दुख हमें इतना गवारा हो गया
— Manish watan















