कितनी मुश्किल दरिया की क्या अजीब सी वो कहानी है
आज नहीं तो कल फिर जान समुंदर में ही गँवानी है
जो था लूट गया वो चेहरे से सब बयाँ हुआ है अब
टूट अगर जाए दिल तो आँखों से बहता पानी है
सब को ख़ूब पता हैं बचपन की ही एक सहेली है
हाथों में इक ख़ास कला ऊपर से रूप की रानी है
वालिद का साया सूरज की किरनें और जवानी ही
एक दफ़ा ये निकल अगर जाए तो न आनी जानी है
बरसों पहले देखे ख़्वाब लगे हैं आज नए से क्यूँ
उम्र हुई फिर भी तू लगती सच में ही नूरानी है
— Manohar Shimpi















