दर्द को दिल के सहारे छोड़ जाता हैदरमियाॅं ख़ुद को हमारे छोड़ जाता हैहू-ब-हू है शख़्सियत उस सी हमारी जोतख़्तियों पे रंग सारे छोड़ जाता हैसोचते हैं देख कर हर शब यही अक्सरकौन रिंदों को किनारे छोड़ जाता हैआसमाॅं से नाप लेता हैं ज़मीं अपनीगर्द में अंकुर सितारे छोड़ जाता है— Ankur Mishra