घर में दीवार पे गुनगुनाते हुए

एक तस्वीर थी मुस्कुराते हुए

जिस तरह ले रही है मिरा इम्तिहाॅं
नाम डरता हूँ उस का बताते हुए

एक अर्सा हुआ इस तरह हम-नशीं
उन लबों से निशाॅं ये मिटाते हुए

शाम बढ़ती थी आँखों में मेरे कभी
ज़िंदगी के बशर गीत गाते हुए

— Ankur Mishra

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