इन गुलों की तरह महफ़िलों से
हम निकाले गए थे दिलों से
इश्क़ दरिया से उन को भी है जो
मिल न पाए कभी साहिलों से
काट लेते हैं अपनी कलाई
ख़ौफ़ आता है इन बुज़दिलों से
काम मुश्किल है 'अंकुर' मोहब्बत
करते रहना तिरे क़ातिलों से
— Ankur Mishra
हम निकाले गए थे दिलों से
इश्क़ दरिया से उन को भी है जो
मिल न पाए कभी साहिलों से
काट लेते हैं अपनी कलाई
ख़ौफ़ आता है इन बुज़दिलों से
काम मुश्किल है 'अंकुर' मोहब्बत
करते रहना तिरे क़ातिलों से
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