जुगनुओं की तरह ख़ामुशी से
जल रहा हूँ तिरी रौशनी से
तेज है धूप ये ख़्वाहिशों की
भीग जाऊँ न मैं तिश्नगी से
रोज़ देती है दस्तक नई इक
ज़िंदगी खिड़कियों पे ख़ुशी से
हो गया हूँ मैं आज़िज बशर इस
बेमुरव्वत तिरी बे-ख़ुदी से
— Ankur Mishra
जल रहा हूँ तिरी रौशनी से
तेज है धूप ये ख़्वाहिशों की
भीग जाऊँ न मैं तिश्नगी से
रोज़ देती है दस्तक नई इक
ज़िंदगी खिड़कियों पे ख़ुशी से
हो गया हूँ मैं आज़िज बशर इस
बेमुरव्वत तिरी बे-ख़ुदी से
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