जुगनुओं की तरह ख़ामुशी सेजल रहा हूँ तिरी रौशनी सेतेज है धूप ये ख़्वाहिशों कीभीग जाऊँ न मैं तिश्नगी सेरोज़ देती है दस्तक नई इकज़िंदगी खिड़कियों पे ख़ुशी सेहो गया हूँ मैं आज़िज बशर इसबेमुरव्वत तिरी बे-ख़ुदी से— Ankur Mishra