कर के उस को हम इशारा देखते हैंहाॅं मुसलसल ये नज़ारा देखते हैंसम्त बैठी है सॅंवर के ज़िंदगी परजा-ब-जा हम वो सितारा देखते हैंइस क़दर है ख़ौफ़ दरिया का कि अंकुरलोग साहिल से किनारा देखते हैं— Ankur Mishra