किस तरह ख़ुद से वफ़ा करतेहम अगर तुझ से दग़ा करतेसम्त तेरी हैं निगाहें सबकिस तरफ़ ये आइना करतेरूठ जाती ये फ़ज़ा हम सेजो परिंदों से गिला करतेहै तक़ाज़ा उम्र का वर्नाइश्क़ तो बे-इंतिहा करते— Ankur Mishra