किस तरह ख़ुद से वफ़ा करते
हम अगर तुझ से दग़ा करते
सम्त तेरी हैं निगाहें सब
किस तरफ़ ये आइना करते
रूठ जाती ये फ़ज़ा हम से
जो परिंदों से गिला करते
है तक़ाज़ा उम्र का वर्ना
इश्क़ तो बे-इंतिहा करते
— Ankur Mishra
हम अगर तुझ से दग़ा करते
सम्त तेरी हैं निगाहें सब
किस तरफ़ ये आइना करते
रूठ जाती ये फ़ज़ा हम से
जो परिंदों से गिला करते
है तक़ाज़ा उम्र का वर्ना
इश्क़ तो बे-इंतिहा करते
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