इक हुस्न-ए-बे-मिसाल है मेरी निगाह मेंदेखो उस ओर मेरा इशारा है उस तरफ़अब नाव अपनी डूबने वाली है साथियोंजो तैर सकते हो तो किनारा है उस तरफ़— Mohit Dixit