ये सोचता हूँ क्यूँ किया आज़ाद चूम करक्यूँ दिन गुज़ारे हम ने तेरी याद चूम करउस एक पल लगा कि ये सब से हसीन हैअगले ही पल वो कर गया बर्बाद चूम कर— Mrkknathji