मेरा ये जिस्म नोचता है कोई
मुझ को अंदर से खा रहा है कोई
आइने में दिखाई देता है
मुझ में आसेब आ बसा है कोई
प्यास जिसने बुझाई है सबकी
उस पे उँगली उठा रहा है कोई
अब नहीं हैं ये आपकी आँखें
इन से अब ख़्वाब देखता है कोई
जाके शादाब से ये कह दो तुम
मुन्तज़िर उस का भी रहा है कोई
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