बरसात क्या है रात भी अर्ज़-ए-हयात भीचुभने लगी है अब तिरी हर एक बात भीतू ही नहीं तो फिर तिरी यादें भी कुछ नहींकुछ भी नहीं मिरे लिए अब काइनात भी— nakul kumar