ग़रीबी को भी तुम आमाल पर छोड़ोये हर दिन अब यूँ ही हर साल पर छोड़ोनहीं सुध लेनी जब यारों किसी को भीमुझे ऐसे ही मेरे हाल पर छोड़ो— Naviii dar b dar