
कुछ हसीन ख़्वाब तो यूँँ पलकों पर सजाए भी थे
इल्म टूट जाने का था हम तो मुस्कुराए भी थे
वक़्त भी न होता ख़फ़ा मेरे हाल पर यूँ नवी
हम तो वरना आसमाॅं को इस ज़मीं पे लाए भी थे
— Naviii dar b dar
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