कुछ हसीन ख़्वाब तो यूँँ पलकों पर सजाए भी थेइल्म टूट जाने का था हम तो मुस्कुराए भी थेवक़्त भी न होता ख़फ़ा मेरे हाल पर यूँ नवीहम तो वरना आसमाॅं को इस ज़मीं पे लाए भी थे— Naviii dar b dar