किया फिर उन सेे मैं इज़हार नितमगर इस बार भी इनकार नितनज़र ने माँग ली थी चाँदनीमिला लेकिन वहीं हर बार नितलिखे ख़त कितने ही जज़्बात मेंरहे लफ़्ज़ों में फिर भी भार नितगुज़रती शाम आई पास जबबढ़ा दिल में तबस्सुम यार नित— Nit