Nit
Nit
Ghazal

पहले तिरा होने का डर

फिर 'नित' तुझे खोने का डर

ख़्वाबों में बसने की ख़ुशी
आँखों में भी रोने का डर

रुस्वा न कर दे ये जहाँ
अब प्यार भी ढोने का डर

सच बोलने की चाह थी
लेकिन सदा खोने का डर

तू पास है फिर भी 'नितिश'
दिल में तुझे खोने का डर

— Nit

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