हम अंजुमन में हैं आए न दिल-लगी के लिए
पठाए हैं किसी ने रब से आशिक़ी के लिए
यूँ जुगनुओं सा टिमटिमा के फ़ाएदा क्या है
जलो चराग़ों सा दुनिया में रौशनी के लिए
सभी के वश में नहीं शे'र शे'र भर कहना
कलेजा चीरना पड़ता है शा'इरी के लिए
ख़याल ख़ुद के उगाना अज़ीब ज़हमत है
क़ज़ा में डूबना पड़ता है ज़िंदगी के लिए
उन्हीं में डूब के रहते तो गल गए होते
कहा है चाय पे बिस्कुट ने आदमी के लिए
— Nityanand Vajpayee















